वीडियो कॉलिंग पर हुई सुनवाई, फैमिली कोर्ट ने मंजूर किया तलाक

वीडियो कॉलिंग पर हुई सुनवाई, फैमिली कोर्ट ने मंजूर किया तलाक

-नागपुर का फैमिली कोर्ट हुआ हाईटेक, वाट्सएप से भेजे जा रहे नोटिस
-पति पुणे तो पत्नी नागपुर में, अारोपी महिला हैदराबाद में

नागपुर : नागपुर फैमिली कोर्ट (पारिवारिक न्यायालय) ने हाल ही में तलाक के एक मामले में वीडियो कॉलिंग के सहारे फैसला सुनाया है। विधि जानकारों के अनुसार इस तरह टेक्नोलॉजी का उपयोग करके नागपुर में पहली बार ही कोई तलाक हुआ है। दरअसल नागपुर निवासी एक महिला ने अपने पति से तलाक लेने के लिए पारिवारिक न्यायालय की शरण ली थी। पत्नी का दावा था कि उसका पति पुणे मंे नौकरी कर रहा है और उसका किसी दूसरी महिला से अफेयर है। कोर्ट में जब यह मामला सुनवाई के लिए आया तो समस्या हुई कि आवेदक महिला तो नागपुर में थी, मगर पति पुणे में। आरोपी महिला (जिससे अफेयर है) हैदराबाद में। सुनवाई में तीनों की व्यक्तिगत हाजिरी संभव नहीं थी। ऐसे में पारिवारिक न्यायालय के प्रमुख न्यायाधीश ई.एम बोहरी ने वीडियो कॉलिंग की मदद लेने का फैसला लिया। स्काइप के माध्यम से वीडियो कॉलिंग पर तीनों की उपस्थिति हुई और सुनवाई शुरू हुई। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने तलाक मंजूर कर लिया।

पावर ऑफ एटर्नी का कांसेप्ट सफल
आधुनिक टेक्नोलॉजी के दौर में कोर्ट की प्रक्रिया भी हाईटेक हो चली है। कई तलाक के मामलों में अगर पति या पत्नी में से कोई एक विदेश में हो, तो विदेश में रह रहा व्यक्ति अपने भरोसेमंद दोस्त या रिश्तेदार को पावर ऑफ अटर्नी सौंप सकता है। वीडियो कॉलिंग में विदेश मंे रह रहा व्यक्ति उपस्थित होता है, तो कोर्ट में अटर्नी अपनी व्यक्तिगत पेशी लगाता है। ऐसे में कोर्ट का जो भी फैसला हो, विदेश में रह रहे व्यक्ति तक आसानी से पहुंच जाता है।

टेक्नोसेवी हुआ कोर्ट

बता दें कि न्यायिक मामलों में तेजी लाने के लिए अब हमारे कोर्ट हाईटेक हो गए हैं। कुछ दिनों पूर्व ही कोर्ट ने वाट्सएप से प्रतिवादी को नोटिस जारी किया था। अब स्काईप और वाट्सएप कॉलिंग का उपयोग सुनवाई के लिए होने लगा है। प्रमुख न्यायाधीश ई.एम. बोहरी के अनुसार वीडियो कॉलिंग से सुनवाई का यह कांसेप्ट मुंबई में शुरू हो चुका है। जहां 10 में से 3 मामलों में स्काईप या वाट्सएप की मदद से वीडियो कॉलिंग पर सुनवाई होती है। इससे न्यायिक प्रक्रिया का काम आसान हो जाता है। मामले से जुड़े पक्षकारों को हर सुनवाई में एक शहर से दूसरे शहर नहीं अाना पड़ता है, न ही मामलों को एक कोर्ट से दूसरे में स्थानांतरित करना पड़ता है। लेकिन अब हाईटेक तकनीक की मदद से न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आ रही है।

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